पुरखौती मुक्तांगन
संकल्पना - राज्य की संस्कृति, परंपरा, पुरातत्व, पर्यावरण और जीव-सृष्टि
की सन्निधि में विकास की कल्पना को साकार करने हेतु पुरखौती मुक्तांगन का निर्माण
कार्य प्रारंभ हुआ और राज्य के पारंपरिक शिल्पियों के द्वारा इसे सांस्कृतिक
धरोहर के रूप में आकार प्रदान करने का संकल्प जीवन्त हुआ। पुरखौती मुक्तांगन
रायपुर से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर ग्राम-उपरवारा में लगभग 200 एकड़ भूमि
पर आकार ग्रहण कर रहा है।
महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा पुरखौती मुक्तांगन के प्रथम चरण का लोकार्पण
किया गया, लोकार्पण समारोह में महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने निर्माणाधीन इस
योजना की सराहना की। राज्य की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के परिसर में माननीय
मुखयमंत्रीजी के हाथों पारंपरिक पौधों का रोपण कर शिल्प ग्राम निर्माण का संकल्प
लिया गया। इस योजना के निर्माण कार्य हेतु ग्रामीण अभियांत्रिकी विभाग, अभनपुर
एवं वन विभाग को क्रियान्वयन एजेन्सी के रूप में दायित्व सौंपा गया है।
लगभग 200 एकड़ परिक्षेत्र में फैला पुरखौती मुक्तांगन शैक्षणिक केन्द्र होगा
जिसमें छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कलाशिल्प, प्राकृतिक संरचना और भौगोलिक
परिदृश्य, पर्यावरण और जैव विविधता को प्रदर्शित करने हेतु विकास कार्य संपन्न
कराया जाना है जिसका लोकार्पण महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा किया गया। महामहिम
द्वारा पुरखौती मुक्तांगन की इस अवधारणा की सराहना की गई है।
प्रथम चरण के विकास कार्य में भव्य प्रवेश द्वार, पर्यटन सूचना केन्द्र, पाथ-वे,
माड़ियापथ, बैगा चौक, देवगुड़ी, छत्तीसगढ़ हाट, आभूषण पार्क, छत्तीस खम्भा चौक,
जलपृष्ठीय रंगमंच, जनजातीय पारंपरिक शेड, मनोरंजक उद्यानगृह, सड़क एवं जल-निकास,
लौह शिल्पियों की कार्यशाला एवं भित्तिचित्र निर्माण, सरगुजा की भित्तिचित्र
का पारंपरिक जाली निर्माण, स्वतंत्रता सेनानियों की मूर्तियों का निर्माण,
चारदीवारी निर्माण, छत्तीसगढ़ का मानचित्र का निर्माण जिसमें छत्तीसगढ़ के विभूतियों
को दिखाया गया है। भू-दृश्य सौंदर्यीकरण एवं विद्युत साज-सज्जा आदि कार्य संपन्न
किये जा चुके हैं।
इस प्रकार पुरखौती मुक्तांगन परिसर को अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किये
जाने एवं शैक्षणिक केन्द्र के रूप में स्थापित किये जाने का कार्य द्रुत
गति से जारी है।
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